"बौहरे ब्राह्मण"                             

बोहरे व बौहरे सनाड्ड ब्राह्मण होते है।

बोहरे, गौतम ऋषि के वंशज माने जाते है। इनका उद्गम स्थान राजस्थान व उत्तर प्रदेश को माना गया है। बोहरे शब्द का अर्थ होता है: अत्यधिक पैसे वाला या स्वयं लक्ष्मीजी का आशीर्वाद जिस पर हो।

बोहरे जाती की शुरुआत :-  जैसा कि ऊपर जानकारी दी गई है कि वे गौतम ऋषि के वंशज होते है। प्राचीन समय में तेजस्वी राजा ने अपने राजगुरु की परीक्षा लेने का निर्णय किया और उन्हें नदी में अपने साथ कश्ती में के गए , बीच नदी में उनसे स्वर्ण आभुषणों की मांग की और चमत्कार दिखाने के लिए विवश किया। जिसके उत्तर में राजगुरु ने नदी के पवित्र जल में हाथ डालकर सोने के आभूषणों से भरे हाथों को राजन को सौंप दिए। यह चमत्कार देख राजा गुरु के चरणों में नतमस्तक हो गया और उन्हें राज दरबार में लौटकर "बोहरे" उपाधि से सुसज्जित किया।।

कई वर्षों के लगातार प्रवास के बाद " बोहरे " मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, महाराष्ट्र व कई राज्यों में मौजूद है। वे प्रवासों के कारण बोहरे, बौहरे, बोहरा आदि नामों से भी जाने जाते है।।।                                           
                                                 लेखक:- "रविकांत बौहरे"

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